Thursday, April 29, 2010

15 July 2002 (from my diary )

जिन्दगी कभी ऐसे चौराहे पर आकर रुक जाती है की इंसान के वश में ये भी नहीं रह जाता की वो कुछ फैसला कर सके और अंतत वोह उस वक़्त को उस दौर के हांथो में छोड़ देता है. मैं भी उसी दौर से गाजर रहा हूँ. सही मायने में आँका जाये तो अछे से जे रहा हूँ. आज जॉब करते हुए लगभग तीन महीने हो गए. मैंने अपनी तनख्वाह बढ़ने की बात की तो उन्होंने मेरे सामने एक शर्त रख दी. मेरी तनख्वाह के साथ-साथ मेरा जॉब टाइम भी बाधा दिए हैं.

हालाँकि मुझे कोई परेशानी नहीं, पर सोचता हूँ की इतने बड़े हॉस्पिटल में मैं अकेला स्टाफ हूँ. इसलिए मैंने उन्हें राय दी की वो एक और स्टाफ रख ले ताकि कभी वक्त आने पर वोह मेरी ग़ैरहाज़िरी में वोह मेरे जिम्मेदारियों को भी सम्भाल ले.

इसलिए मैं अजय सर से कहा की वोह मेरे दोस्त को उस दुसरे स्टाफ के रूप में रख ले ताकि हम एक दुसरे के संपर्क में बने रहे. ऐसा मैंने इसलिए कहा क्युंकी इस पुरे अरेना में यूँ तोह मेरा झगडा किसी से नहीं है पर दोस्ती सिर्फ उमेश से है, पर सर एक दुसरे लड़के को रखवाना चाहते हैं, अब मेरे सामने मुश्किल ये गयी है की या तोह मैं अकेले अपनी साडी जिम्मेदारियों को निभौं या फिर उमेश के साथ स्टाफ पार्टनर बनकर जॉब करूँ। पर संभव नहीं लगता और अगर मैं अकेला अपना काम खुद करता हूँ तो मुझे बहूत कुछ चोदना पड़ेगा, पहले पढाई जो की लगभग मैं छोड़ ही रखा है दूसरा
drawing क्लास क्यूंकि अब मेरे पास समय नहीं होगा। तीसरा मेरे पास पहले से भी कम वक़्त हो जायेगा। अब मैं मुश्किल में हूँ। अकेले करता हूँ तो काफी व्यस्त हो जाता हूँ और साथ काम करना चाहता हूँ तो वो साथी नहीं मिलता जिसकी इक्षा है फिर भी ये फैश्ला मैंने कल पे छोड़ दिया है। कल से या तो मैं १२ से जॉब करूँगा या अपने उस दोस्त के साथ पार्टनर जॉब क्यूंकि इतनी छूट मुझे दी गयी है की मैं चहुँ तो अपनी जिम्मेदारी के साथ नयी जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाऊ। जाने कल क्या होता है।
वैसे सोने से पहले दुआ करता जा रहा हूँ की मेरे साथ काम में हाथ बताये तो उमेश। देखता हूँ इस बार अपने दिल की दुआ खुदा तक पहुँचता है या नहीं.

Tuesday, April 27, 2010

looking for life partner

jab sari duniya flickr, facebook, linkedin, twitter aur social networking ki chaka-choundh mein massgul hain, wahan main apne liye shaadi.com, matrimonial, jeevansaathi jaise site pe ladkiyan dhoondh raha hoon. kya bakwas hai. What the fuck.

jindgi ka ye safar tay tha, magar is mod se hokar gujregi, ye maloom nahi tha.
main jayda late to nahi hoon. us waqt tak paida ho chuka tha jab jodiya bhagwaan banaya karte the. magar mujhe kya pata tha ki mere jawan hone tak duniya is kadar badal jayegi, ki apne liye ek adad wife bhi internet pe dhoondhni padegi.

chalo dekhta hoon kisi haseen se mulakat hoti hai ya laut ke budhhu ghar ko aaye wali baat...